हमेशा खुश रहने के सबसे अच्छे तरीके – Tips to Be Happy Forever

दुनिया में अधिकांश लोगों से यदि यह पूछा जाए कि इस समय वो क्या चाहते हैं, तो शायद 90 प्रतिशत से अधिक लोग कहेंगे, खुशी।

ये सच है कि खुश रहना सभी चाहते हैं लेकिन वहीं ये भी सच है कि सभी लोग दुख और खुशी के बीच डावाडोल जीवन ही जीते रहते हैं।

खुशी वैसे तो हमेशा रहने वाली अवस्था नहीं, लेकिन फिर भी कुछ ऐसी बातें होती ही हैं जो आपको हमेशा खुश रखती हैं। कम से कम ये तो कह ही सकते हैं कि आपको दुख से दूर रखती हैं।

ऐसी आदतें अपनाने मात्र से ही आप धीरे धीरे अपने दुखों से मुक्त हो सकते हैं।

भगवान बुद्ध के शब्दों में खुश रहने का उपाय

भगवान बुद्ध ने अपनी शिक्षाओं के जरिए लाखों लोगों को उनके दुखों से मुक्त किया। भारत की पुरातन विद्या विपश्यना को ढूंढ़ कर उस से अपना और अन्य लोगों का भी उद्धार किया।

भगवान बुद्ध कहते हैं कि आसक्ति ही दुख का मूल है। किसी वस्तु से आसक्ति कम होना आपको उसके नहीं होने पर दुख नहीं देता।

जैसे उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति से अत्यंत लगाव ही वियोग में उस दुख का कारण बन जाता है।

अपनी एक घड़ी के खोने का दुख सबको होता है। लेकिन उसी तरीके की घड़ी यदि आपके मित्र से को जाए तो आप नहीं दुखी होंगे। सच तो यह है कि दुख या सुख उस घड़ी से नहीं बल्कि उस से हुई आसक्ति से जन्मा है।

खुशी के आकर्षण का सिद्धांत

यदि मैं आपसे कहूं की खुशी और दुख दोनों ही असल में हम स्वयं ही आकर्षित करते हैं तो पहली बार बहुत कम लोग विश्वास करेंगे।

कर्मों के प्रभाव को आप कुछ ऐसे देखिए।

किसी वट के पेड़ से जो बीज गिरते हैं, वो सभी अपने अंदर उतना ही बड़ा पेड़ समेटे हुए हैं, जो समय के साथ जमीन से उग जाएगा।

उसी प्रकार आपकी दुख और खुशी की प्रतिक्रिया आने वाले दुख, सुख या खुशी को आकर्षित करती है। परिस्थिति का तो नियम ही होता है बदलना।

परिस्थितियों पर निर्भर रहने वाली खुशी कभी हमेशा नहीं रह सकती। सिर्फ परिवर्तन ही एकमात्र है जो साश्वत रहता है। इसलिए, हमेशा खुश रहने के लिए यह चाहिए कि सुख में अत्यंत नाचना और दुख में अत्यंत रोना आने वाले दुख को ही आकर्षित करता है।

स्वयं की औरों से तुलना ना करना

तुलना करना मानव का एक सामान्य गुण है। अपनी लाभ हानि, अच्छा बुरा, छोटा बड़ा, सही गलत जैसी अनेक तुलना मन करता ही रहता है। लेकिन तुलना खुशियों को अक्सर कम कर देती है। खासकर जब हम अपनी तुलना औरों से करने लगते हैं।

जैसे, मान लीजिए कोई लड़की पूरा दिन मेकअप सिर्फ इस लिए करती है कि वह दीपिका पादुकोण जैसी लगे। सच तो ये है कि अधिकांश दुनिया जो हम सामने देखते हैं हम उसकी प्रतिछाया अपने मन में बना लेते हैं। फिर चाहे वह सचमुच वैसा ही ही नहीं।

हो सकता है कि आप जिसे बहुत अच्छा समझ रहे हैं असल में उसके जीवन में दुख ही दुख है। या वह भी आपकी ही तरह सोचता है। अच्छी बातें तो कोई भी कर सकता है। इस लिए अपने अंदर ही खुशी ढूंढने और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करना ही अच्छा है।

वैसे ही, अपने को औरों से बेहतर समझना भी आपको खुशियों से दूर कर देता है। क्योंकि कोई भी शक्ति सदैव नहीं रहती। इस लिए अभिमान व्यर्थ है। आप जिसे कल तक इज्जत नहीं देते, हो सकता है कल वह एकमात्र व्यक्ति हो जो आपके साथ खड़ा है।

हमारी खुशी हम ही से है

हम सभी अपने जीवन के खुद मालिक हैं। अपने दुखों और सुखों का निर्माण करते हैं। सच तो ये है कि जिन खुशियों के देख कर हमें लगता है कि ये हमें किसी बाहरी वस्तु या व्यक्ति से मिली है, वह असल में उस वस्तु के प्रति हमारी संवेदना से मिलती है।

स्वयं से और औरों से प्रेम, अपने और दूसरों से कम आसक्ति, करुणा और दया ही हमेशा खुश रहने के उपाय हैं।

सर्वे भवन्तु सुखिन

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