मेरी प्यारी बर्फी, कुतुबखाने से निकलकर घंटाघर के रास्ते कोतवाली से होते हुए आज फिर गुज़रा। पुराने बस अड्डे से आगरा की बस पकड़नी थी। सालों बाद काम के बहाने ही सही मौका तो मिला मुझे वापस आने का, अपने...